महाभारत 12.137.57
वधबन्धभयादेके मोक्षतन्त्रमुपागताःमरणोत्पातजं दुःखमाहुर्धर्मविदो जनाः
vadhabandhabhayādeke mokṣatantramupāgatāḥmaraṇotpātajaṃ duḥkhamāhurdharmavido janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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