महाभारत 12.137.78
दैवं पुरुषकारश्च स्थितावन्योन्यसंश्रयात्उदात्तानां कर्म तन्त्रं दैवं क्लीबा उपासते
daivaṃ puruṣakāraśca sthitāvanyonyasaṃśrayātudāttānāṃ karma tantraṃ daivaṃ klībā upāsate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें