महाभारत 12.137.94
भार्या देशोऽथ मित्राणि पुत्रसंबन्धिबान्धवाःएतत्सर्वं गुणवति धर्मनेत्रे महीपतौ
bhāryā deśo'tha mitrāṇi putrasaṃbandhibāndhavāḥetatsarvaṃ guṇavati dharmanetre mahīpatau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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