महाभारत 12.14.20
रक्षितं द्रोणकर्णाभ्यामश्वत्थाम्ना कृपेण चतत्त्वया निहतं वीर तस्माद्भुङ्क्ष्व वसुंधराम्
rakṣitaṃ droṇakarṇābhyāmaśvatthāmnā kṛpeṇa catattvayā nihataṃ vīra tasmādbhuṅkṣva vasuṃdharām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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