महाभारत 12.14.2
महाभिजनसंपन्ना श्रीमत्यायतलोचनाअभ्यभाषत राजेन्द्रं द्रौपदी योषितां वरा
mahābhijanasaṃpannā śrīmatyāyatalocanāabhyabhāṣata rājendraṃ draupadī yoṣitāṃ varā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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