महाभारत 12.14.36
एतेषां यतमानानामुत्पद्यन्ते तु संपदःत्वं तु सर्वां महीं लब्ध्वा कुरुषे स्वयमापदम्
eteṣāṃ yatamānānāmutpadyante tu saṃpadaḥtvaṃ tu sarvāṃ mahīṃ labdhvā kuruṣe svayamāpadam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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