महाभारत 12.14.38
प्रशाधि पृथिवीं देवीं प्रजा धर्मेण पालयन्सपर्वतवनद्वीपां मा राजन्विमना भव
praśādhi pṛthivīṃ devīṃ prajā dharmeṇa pālayansaparvatavanadvīpāṃ mā rājanvimanā bhava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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