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महाभारत 12.140.36
या देवतासु वृत्तिस्ते सास्तु विप्रेषु सर्वदाक्रुद्धैर्हि विप्रैः कर्माणि कृतानि बहुधा नृप
yā devatāsu vṛttiste sāstu vipreṣu sarvadākruddhairhi vipraiḥ karmāṇi kṛtāni bahudhā nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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