महाभारत 12.141.18
वारिधारासमूहैश्च संप्रहृष्टः शतक्रतुःक्षणेन पूरयामास सलिलेन वसुंधराम्
vāridhārāsamūhaiśca saṃprahṛṣṭaḥ śatakratuḥkṣaṇena pūrayāmāsa salilena vasuṃdharām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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