महाभारत 12.141.21
पक्षिणो वातवेगेन हता लीनास्तदाभवन्मृगाः सिंहा वराहाश्च स्थलान्याश्रित्य तस्थिरे
pakṣiṇo vātavegena hatā līnāstadābhavanmṛgāḥ siṃhā varāhāśca sthalānyāśritya tasthire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें