महाभारत 12.142.21
स पत्न्या वचनं श्रुत्वा धर्मयुक्तिसमन्वितम्हर्षेण महता युक्तो बाष्पव्याकुललोचनः
sa patnyā vacanaṃ śrutvā dharmayuktisamanvitamharṣeṇa mahatā yukto bāṣpavyākulalocanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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