महाभारत 12.142.34
न मेऽस्ति विभवो येन नाशयामि तव क्षुधाम्उत्पन्नेन हि जीवामो वयं नित्यं वनौकसः
na me'sti vibhavo yena nāśayāmi tava kṣudhāmutpannena hi jīvāmo vayaṃ nityaṃ vanaukasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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