महाभारत 12.142.3
वातवर्षं महच्चासीन्न चागच्छति मे प्रियाकिं नु तत्कारणं येन साद्यापि न निवर्तते
vātavarṣaṃ mahaccāsīnna cāgacchati me priyākiṃ nu tatkāraṇaṃ yena sādyāpi na nivartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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