महाभारत 12.142.43
अहो मम नृशंसस्य गर्हितस्य स्वकर्मणाअधर्मः सुमहान्घोरो भविष्यति न संशयः
aho mama nṛśaṃsasya garhitasya svakarmaṇāadharmaḥ sumahānghoro bhaviṣyati na saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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