महाभारत 12.147.21
यथा ते मत्कृते क्षेमं लभेरंस्तत्तथा कुरुप्रतिजानीहि चाद्रोहं ब्राह्मणानां नराधिप
yathā te matkṛte kṣemaṃ labheraṃstattathā kurupratijānīhi cādrohaṃ brāhmaṇānāṃ narādhipa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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