महाभारत 12.147.8
अर्वाक्च प्रतितिष्ठन्ति पुलिन्दशबरा इवन ह्ययज्ञा अमुं लोकं प्राप्नुवन्ति कथंचन
arvākca pratitiṣṭhanti pulindaśabarā ivana hyayajñā amuṃ lokaṃ prāpnuvanti kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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