महाभारत 12.148.31
पापं कृत्वा न मन्येत नाहमस्मीति पूरुषःचिकीर्षेदेव कल्याणं श्रद्दधानोऽनसूयकः
pāpaṃ kṛtvā na manyeta nāhamasmīti pūruṣaḥcikīrṣedeva kalyāṇaṃ śraddadhāno'nasūyakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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