महाभारत 12.149.101
यदि गृध्रस्य वाक्यानि तीव्राणि रभसानि चगृह्णीत मोहितात्मानः सुतो वो न भविष्यति
yadi gṛdhrasya vākyāni tīvrāṇi rabhasāni cagṛhṇīta mohitātmānaḥ suto vo na bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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