महाभारत 12.149.29
पञ्चभूतपरित्यक्तं शून्यं काष्ठत्वमागतम्कस्माच्छोचथ निश्चेष्टमात्मानं किं न शोचथ
pañcabhūtaparityaktaṃ śūnyaṃ kāṣṭhatvamāgatamkasmācchocatha niśceṣṭamātmānaṃ kiṃ na śocatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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