महाभारत 12.149.61
न स्नेहस्य विरोधोऽस्ति विलापरुदितस्य वैमृतस्यास्य परित्यागात्तापो वै भविता ध्रुवम्
na snehasya virodho'sti vilāparuditasya vaimṛtasyāsya parityāgāttāpo vai bhavitā dhruvam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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