महाभारत 12.149.64
तथा कश्चिद्भवेत्सिद्धो मुनिर्वा देवतापि वाकृपणानामनुक्रोशं कुर्याद्वो रुदतामिह
tathā kaścidbhavetsiddho munirvā devatāpi vākṛpaṇānāmanukrośaṃ kuryādvo rudatāmiha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें