महाभारत 12.149.82
न मे मानुषलोकोऽयं मुहूर्तमपि रोचतेअहो धिग्गृध्रवाक्येन संनिवर्तथ मानुषाः
na me mānuṣaloko'yaṃ muhūrtamapi rocateaho dhiggṛdhravākyena saṃnivartatha mānuṣāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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