महाभारत 12.149.86
रूपयौवनसंपन्नं द्योतमानमिव श्रियाजीवन्तमेनं पश्यामि मनसा नात्र संशयः
rūpayauvanasaṃpannaṃ dyotamānamiva śriyājīvantamenaṃ paśyāmi manasā nātra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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