महाभारत 12.149.9
न पुनर्जीवितः कश्चित्कालधर्ममुपागतःप्रियो वा यदि वा द्वेष्यः प्राणिनां गतिरीदृशी
na punarjīvitaḥ kaścitkāladharmamupāgataḥpriyo vā yadi vā dveṣyaḥ prāṇināṃ gatirīdṛśī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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