महाभारत 12.15.39
न संवत्सरसत्राणि तिष्ठेयुरकुतोभयाःविधिवद्दक्षिणावन्ति यदि दण्डो न पालयेत्
na saṃvatsarasatrāṇi tiṣṭheyurakutobhayāḥvidhivaddakṣiṇāvanti yadi daṇḍo na pālayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें