महाभारत 12.150.19
बन्धुत्वादथ वा सख्याच्छल्मले नात्र संशयःपालयत्येव सततं भीमः सर्वत्रगोऽनिलः
bandhutvādatha vā sakhyācchalmale nātra saṃśayaḥpālayatyeva satataṃ bhīmaḥ sarvatrago'nilaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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