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महाभारत 12.151.11
मयि वै त्यज्यतां क्रोधः किं मे क्रुद्धः करिष्यसिन ते बिभेमि पवन यद्यपि त्वं स्वयंप्रभुः
mayi vai tyajyatāṃ krodhaḥ kiṃ me kruddhaḥ kariṣyasina te bibhemi pavana yadyapi tvaṃ svayaṃprabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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