महाभारत 12.151.20
स परित्यज्य शाखाश्च पत्राणि कुसुमानि चप्रभाते वायुमायान्तं प्रत्यैक्षत वनस्पतिः
sa parityajya śākhāśca patrāṇi kusumāni caprabhāte vāyumāyāntaṃ pratyaikṣata vanaspatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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