महाभारत 12.152.30
ये न हृष्यन्ति लाभेषु नालाभेषु व्यथन्ति चनिर्ममा निरहंकाराः सत्त्वस्थाः समदर्शिनः
ye na hṛṣyanti lābheṣu nālābheṣu vyathanti canirmamā nirahaṃkārāḥ sattvasthāḥ samadarśinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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