महाभारत 12.154.17
गुरुपूजा च कौरव्य दया भूतेष्वपैशुनम्जनवादोऽमृषावादः स्तुतिनिन्दाविवर्जनम्
gurupūjā ca kauravya dayā bhūteṣvapaiśunamjanavādo'mṛṣāvādaḥ stutinindāvivarjanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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