महाभारत 12.157.4
एते प्रमत्तं पुरुषमप्रमत्ता नुदन्ति हिवृका इव विलुम्पन्ति दृष्ट्वैव पुरुषेतरान्
ete pramattaṃ puruṣamapramattā nudanti hivṛkā iva vilumpanti dṛṣṭvaiva puruṣetarān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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