महाभारत 12.159.17
न ब्राह्मणान्वेदयेत कश्चिद्राजनि मानवःअवीर्यो वेदनाद्विद्यात्सुवीर्यो वीर्यवत्तरम्
na brāhmaṇānvedayeta kaścidrājani mānavaḥavīryo vedanādvidyātsuvīryo vīryavattaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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