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महाभारत 12.159.28
न नर्मयुक्तं वचनं हिनस्ति; न स्त्रीषु राजन्न विवाहकालेन गुर्वर्थे नात्मनो जीवितार्थे; पञ्चानृतान्याहुरपातकानि
na narmayuktaṃ vacanaṃ hinasti; na strīṣu rājanna vivāhakālena gurvarthe nātmano jīvitārthe; pañcānṛtānyāhurapātakāni
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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