Loading
महाभारत 12.159.55
तल्पे चान्यस्य चौर्ये च पृथक्संवत्सरं चरेत्त्रीणि श्रोत्रियभार्यायां परदारे तु द्वे स्मृते
talpe cānyasya caurye ca pṛthaksaṃvatsaraṃ carettrīṇi śrotriyabhāryāyāṃ paradāre tu dve smṛte
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें