महाभारत 12.161.9
समाप्तवचने तस्मिन्नर्थशास्त्रविशारदःपार्थो वाक्यार्थतत्त्वज्ञो जगौ वाक्यमतन्द्रितः
samāptavacane tasminnarthaśāstraviśāradaḥpārtho vākyārthatattvajño jagau vākyamatandritaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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