महाभारत 12.162.35
वक्राङ्गांस्तु स नित्यं वै सर्वतो बाणगोचरेजघान गौतमो राजन्यथा दस्युगणस्तथा
vakrāṅgāṃstu sa nityaṃ vai sarvato bāṇagocarejaghāna gautamo rājanyathā dasyugaṇastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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