महाभारत 12.166.13
ततोऽविदूरे जगृहुर्गौतमं राक्षसास्तदाराजधर्मशरीरं च पक्षास्थिचरणोज्झितम्
tato'vidūre jagṛhurgautamaṃ rākṣasāstadārājadharmaśarīraṃ ca pakṣāsthicaraṇojjhitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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