महाभारत 12.166.23
दस्यवश्चापि नैच्छन्त तमत्तुं पापकारिणम्क्रव्यादा अपि राजेन्द्र कृतघ्नं नोपभुञ्जते
dasyavaścāpi naicchanta tamattuṃ pāpakāriṇamkravyādā api rājendra kṛtaghnaṃ nopabhuñjate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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