महाभारत 12.166.2
स चापि पार्श्वे सुष्वाप विश्वस्तो बकराट्तदाकृतघ्नस्तु स दुष्टात्मा तं जिघांसुरजागरत्
sa cāpi pārśve suṣvāpa viśvasto bakarāṭtadākṛtaghnastu sa duṣṭātmā taṃ jighāṃsurajāgarat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें