महाभारत 12.167.13
सभाण्डोपस्करं राजंस्तमासाद्य बकाधिपःसंपरिष्वज्य सुहृदं प्रीत्या परमया युतः
sabhāṇḍopaskaraṃ rājaṃstamāsādya bakādhipaḥsaṃpariṣvajya suhṛdaṃ prītyā paramayā yutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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