महाभारत 12.167.8
यदा बकपती राजन्ब्रह्माणं नोपसर्पतिततो रोषादिदं प्राह बकेन्द्राय पितामहः
yadā bakapatī rājanbrahmāṇaṃ nopasarpatitato roṣādidaṃ prāha bakendrāya pitāmahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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