महाभारत 12.17.8
एकोदरकृते व्याघ्रः करोति विघसं बहुतमन्येऽप्युपजीवन्ति मन्दवेगंचरा मृगाः
ekodarakṛte vyāghraḥ karoti vighasaṃ bahutamanye'pyupajīvanti mandavegaṃcarā mṛgāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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