महाभारत 12.171.50
एष ब्रह्मप्रविष्टोऽहं ग्रीष्मे शीतमिव ह्रदम्शाम्यामि परिनिर्वामि सुखमासे च केवलम्
eṣa brahmapraviṣṭo'haṃ grīṣme śītamiva hradamśāmyāmi parinirvāmi sukhamāse ca kevalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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