महाभारत 12.171.55अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्गीतं विदेहराजेन जनकेन प्रशाम्यताatrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanamgītaṃ videharājena janakena praśāmyatāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें