महाभारत 12.172.18
इति भूतानि संपश्यन्ननुषक्तानि मृत्युनासर्वसामान्यतो विद्वान्कृतकृत्यः सुखं स्वपे
iti bhūtāni saṃpaśyannanuṣaktāni mṛtyunāsarvasāmānyato vidvānkṛtakṛtyaḥ sukhaṃ svape
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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