महाभारत 12.172.20
आस्रवत्यपि मामन्नं पुनर्बहुगुणं बहुपुनरल्पगुणं स्तोकं पुनर्नैवोपपद्यते
āsravatyapi māmannaṃ punarbahuguṇaṃ bahupunaralpaguṇaṃ stokaṃ punarnaivopapadyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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