महाभारत 12.173.50
ततः स मुनिरुत्थाय काश्यपस्तमुवाच हअहो बतासि कुशलो बुद्धिमानिति विस्मितः
tataḥ sa munirutthāya kāśyapastamuvāca haaho batāsi kuśalo buddhimāniti vismitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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