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महाभारत 12.175.15
ततस्तेजोमयं दिव्यं पद्मं सृष्टं स्वयंभुवातस्मात्पद्मात्समभवद्ब्रह्मा वेदमयो निधिः
tatastejomayaṃ divyaṃ padmaṃ sṛṣṭaṃ svayaṃbhuvātasmātpadmātsamabhavadbrahmā vedamayo nidhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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