महाभारत 12.18.3
उत्सृज्य राज्यं भैक्षार्थं कृतबुद्धिं जनेश्वरम्विदेहराजं महिषी दुःखिता प्रत्यभाषत
utsṛjya rājyaṃ bhaikṣārthaṃ kṛtabuddhiṃ janeśvaramvideharājaṃ mahiṣī duḥkhitā pratyabhāṣata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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