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महाभारत 12.180.24
क्षेत्रज्ञं तं विजानीहि नित्यं लोकहितात्मकम्तमो रजश्च सत्त्वं च विद्धि जीवगुणानिमान्
kṣetrajñaṃ taṃ vijānīhi nityaṃ lokahitātmakamtamo rajaśca sattvaṃ ca viddhi jīvaguṇānimān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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